BHAJAN

🌺चिरजाविनय🌺
आवज्यो उबैल मावङ आवज्यो उबैल,
थारां छौरू जो रहिया बाट करनल आवज्यो उबैल।।टेर।।
मैहेलां वो तो माजी सुणियो, जाळी झरोखां ऐल।
झिणी ठाडी बाव तझ मां ,
जटपट् विज्यो गैल।।
आवज्यो उबैल मावङ आवज्यो उबैल,
थांरा छौरू जो रहिया बाट करनल
आवज्यो उबैल
।१।।
जै रमती वो मां कैलाशां,
हिम ढकिया रभ्य शैल।
भौळै नै सागै लै शक्ति,
आवो धर तझ खैल।
आवज्यो उबैल मावङ आवज्यो उबैल,
थांरा छौरू जो रहिया बाट करनल आवज्यो उबैल। ।२।।
मां थै अगर ध्यान मै बैठा,
तपता धूणी तपैल।
पलक उगाङ पथां जट् होज्यो,
खावण बाळ खचैल।।
आवज्यो उबैल मावङ आवज्यो उबैल,
थांरा छौरू जो रहिया बाट करनल आवज्यो उबैल।।३।।
गढा मढा बैठिया जौ झामण,
तझियो राम्मत
खैल।
समन्दा सैल रोक मां आवो,
हो रही गणी उबैल।।
आवज्यो उबैल मावङ आवज्यो उबैल,
थांरा छौरू जो रहिया बाट करनल आवज्यो उबैल।।४।।
रणां वनां जै वो मां करणी,
न्हातै नीर नवैल।
साहण सुण डोकर डाडाळी,
चढ धावोजी बबरैल।।
आवज्यो उबैल मावङ आवज्यो उबैल,
थांरा छौरू जो रहिया बाट करनल आवज्यो
।।५।।
आश अमर मां पूरण अम्बा,
और नही हम गैल।
एक मात् बस आश तिहारी,
आवो ना ध्यातां पैल।।
आवज्यो उबैल मावङ आवज्यो उबैल,
थांरा छौरू जो रहिया बाट करनल आवज्यो उबैल मावङ आवज्यो उबैल
।।६।।
चित थित धार अटल मां करणी,
चिरजां चरण सूहैल।
“महिया नाराण “कष्ट जग काटण,
रोग कोरोणां बैल।।
आवज्यो उबैल मावङ आवज्यो उबैल,
थांरा छौरू जो रहिया बाट करनल आवज्यो उबैल मावङ आवज्यो उबैल
।।७।।
🌷🌷🙏🌷🌷
✍महिया नारायण (नारायण सिंह चारण जाटावास हाल उदयुर)

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KARNI MATA BHAJAN

. *।। चिरजा ।।*
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तर्ज -जाए तो जाए कहां.. (हिन्दी गाना)
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आओ मां आयां.. सरे…..
किस विद मां देर करे…
चरणा परे(पड़े)..तोरा ध्यान धरे..
आओ मां आयां सरे..(स्थाई)

भुमि पे,बिमारी…आई मां भारी..
लोग मरे है ,छाई लाचारी…
हार गये मां कुण,विपदा हरे
आओ मां आयां.. सरे…..
किस विद मां देर करे..
चरण परे (पड़े) ध्यान धरे..
आओ मां आयां सरे..(1)

काळ बिछ्यो है ,जाळ रच्यो है
मौत प्राणां में,मातम मच्यो है..
देख दशा सब, बहुत डरे..
आओ मां आयां..सरे…..
किस विद मां देर करे…
चरण परे,ध्यान धरे …
आओ मां आयां सरे..(2)

आफत आई..सजो संकलाई..
मदद करो शुभ, मंगल मेहाई..
काटत रोग नै..पटक परे..
आओ मां आयां.. सरे…..
किस विद मां देर करे…
चरण परे (तेरा)..ध्यान धरे.
आओ मां आयां ही सरे…(3)

आश‌ न टूटे,विश्वास ना टूटे..
सांसो ही सांस करणी,नाम न छूटे..
नाम तेरे से भव,नाव तरे…
आओ मां आयां.. सरे…..
किस विद मां देर करे…
चरण परे(पड़े) तेरा ध्यान धरे..
.आओ मां, आयां सरे..(4)

विनय विचारो,पल में पधारो..
भणे रिछपाल बारठ,आय उबारो..
आप पधारयां …दुखड़ा टरे..
आओ मां आयां.. सरे…..
किस विद मां देर करे…
चरण परे(पड़े) ध्यान धरे …
आओ मां आयां सरे..(5)
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*रिछपाल बारहठ रजवाड़ी*

NEW KARNI MATA CHIRJA

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।। चिरजा श्री आवड़ माँ की ।।

थें तो सातु हि बहिन समेत,
आवड़ म्हारें हरख आवो माँ घण हैत ।
आवड़ माँ म्हारें सदन बिराजो घण हैत।
1
कोड घणो मन में करू माँ, धरू ध्यान दिनरात ।
हरख पधारो हैत सूं माँ, सेवक करण सनात ।
2
कदम बढावौ कर कृपा माँ, आवो अनत उमंग ।
लारे महिरख लावजौ माँ, सातु बहिनां संग ।
3
आप आयां आणंद हुवें, माँ मौत्यां बरसें मैह ।
हाथ जोड़ हाजिर रहै, माँ सारा सुख सैदैह ।
4
आप बिराजो आयने माँ, सायर करणी संग ।
हरख बजावुं हाजरी माँ, अणहद कोड उमंग ।
5
हरसित चित श्री चरण में, माँ हाजिर रहूं हमेंश ।शरणागत शिशु “जय” तणी,विनती यहि विशैष।

विनीत:- जयसिंह सिंढ़ायच मण्डा
राजसमन्द

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सगती आरत सांभळे , तारत आवड़ त्यांय ।।
देवी भारत देश री , सारत काज सदाय ।।1।।

इम परवाड़ा आपरा , म्हें सुणिया घण मात ।।
अवस रखावण आवसी , बणी तिहारी बात ।।2।।

उर बीच शंको आवड़ा, इम सालत हैं आज ।।
दीसै नह हथ दोकड़ो , किम सरसी मां काज ।।3।।

मीठा परचा मात हैं , आवड़ दिया अनेक ।।
रदे भरोसो राखके , नांह नीति तज नेक ।।4।।

अद्रश्य रूपे आवसी , सगती करण सहाय ।।सिध कारज होसी सबे , महर कियां महमाय ।।5।।

विपदा हर विसवेसरी , कर किरपा किनयांण ।।
धर दैसांणे तूं धणी , सर धर हाथ सुजांण ।।6।।

साद दास रो सांभळे , मात धरो नह मौन ।।
आप न तारण आवसी , (तो) करे भीर फिर कौन ।।7।।

देवी पकड़ो दास की , बूडत वखते बांह ।।
जद जाचक तव जांणसी , नांव डूबेगी नांह ।।8।।

छेलो अब तो सांभळो , हेलो करूं हुजुर ।।
माया मेलो मावड़ी , भर थैलो भरपूर ।।9।।

दश दोहां में दाखवी , मन री पीड़ा मीर ।।
काज सुधारण कारणें , भयहू करणी भीर ।।10।।
मीठा मीर डभाल

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!!”गीत माँ मेहाई ने अरदास रो”!! *चंडू लालस "भँवर"!!*

!! सोरठो !!

गाफल भूल गयोह,
सुख मांही सरकार नें !
पण हिव दुखः पयोह,
आवो बेगा ईशरी !!

!! “गीत” !!


भीड़ अब पड़ी है आव थूं भग्गती,
पग्गती नही मम अवर पूजा !
स्याय हिव करे नह जगत में शगत्ती,
दगत्ती समय इण मांय दूजा !!1!!

दानवी आज माँ दूख अति देत है,
देत है कष्ट वे आय दामण !
करनला मावड़ी गई थूं केथ है,
जेथ है तेथ सूं आव जामण !!2!!

अम्बिका जदी थूं सिंघ चढ़ आवसी,
जावसी तदी माँ त्रास दधि जाझो !
पात सब आपरा घणो सुख पावसी,
गावसी खुशी रा गीत गाजो !!3!!

थिती में कळू रा देव सब थाकसी,
राखसी मात हिक लाज रैंणो !
तिहारा पूत माँ वाट सै ताक़सी,
साखसी वणी अब राख सैणों !!4!!

दया कर आयने दुष्ट सै दाऴ जे,
धरम थिर राखजे मात धरणी !
‘भँवर’ रा अवग्गुण मती थूं भाऴजे,
काळजै चेप हिय आय करणी !!5!!

दुष्ट मिल जदै दुख पात ने देवसी,
सैवसी केम तद मात शगती !
राखीयों तुझ ही लाज मम रैवसी,
निज्जसी नहीतो जोतआ जगती !!6!!

पूत माँ आपरा तदी दुख पावसी,
जावसी जदी थूं दूर थ्रोगण !
भगवती एम चित थने किम भावसी,
जावसी थाहरी लाज जोगण !!7!!

अब्बखी टेम जे मात नह आवीया,
धावीया नही जे चील बण धोळी !
छोरुओं ऊपरे त्रास अति छाविया,
मावीया घणा दुख वखत मौली !!8!!

पात माँ आपरा कष्ट अती पात है,
जात है वीख में आज जबरी !
मेहजा भूलने गई कित मात है,
गात है पात सब आव गवरी !!9!!

जोग सूं डूबरी आज माँ जात है,
वात है त्रास नह जाय वरणी !
म्हां रे आसरो तुंही हिक मात है,
तात है भ्रात है मात जग तरणी !!10!!

छोरुओं ढाकजे लोवड़ी छिंयांथूं,
सया घण करे माँ मात जग सेवी !
मेहजा ‘भँवर’ रै राखजे मया थूं,
दया हिव दाखजे आय देवी !!11!! *चण्डीदान लाऴस विरचित गीत माँ करणी जी रो !! कविवर ने अपनी काव्य कौशल कला का खुलकर उपयोग किया है, ह्रदय के भाव संमुद्र को मां के चरणो मे अर्पित कर दिया है !!*

राजेन्द्रसिंह कविया संतोषपुरा सीकर !!