राजस्थान और भारत: जुलाई 2024 से जुलाई 2025 तक के विषयवार करेंट अफेयर्स का विस्तृत विश्लेषण
I. कार्यकारी सारांश
जुलाई 2024 से जुलाई 2025 की अवधि भारत और राजस्थान दोनों के लिए महत्वपूर्ण परिवर्तनों और विकासात्मक पहलों से चिह्नित रही है। राष्ट्रीय स्तर पर, शासन में आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण की दिशा में एक स्पष्ट झुकाव देखा गया, जिसमें नए आपराधिक कानूनों का कार्यान्वयन और वित्तीय नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं। आर्थिक मोर्चे पर, भारत ने स्थिर जीडीपी वृद्धि बनाए रखी, जबकि समावेशी विकास और बुनियादी ढांचे के नेतृत्व वाले विकास पर जोर दिया गया। सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों का विस्तार किया गया, विशेष रूप से कमजोर वर्गों पर ध्यान केंद्रित किया गया, हालांकि कुछ कार्यान्वयन चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में, अंतरिक्ष कार्यक्रम में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी अनुसंधान पर विशेष ध्यान दिया गया।
राजस्थान में, राज्य सरकार ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और सार्वजनिक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए व्यापक विधायी और नीतिगत सुधार किए। वित्तीय प्रदर्शन में राजकोषीय विवेक और पूंजीगत व्यय में वृद्धि देखी गई, जो आर्थिक विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सामाजिक क्षेत्र में, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा पर केंद्रित कई नई योजनाएं शुरू की गईं। पर्यावरण संरक्षण और प्रौद्योगिकी एकीकरण भी प्रमुख विषय रहे, जिसमें हरित पहल और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण शामिल हैं। खेल और संस्कृति के क्षेत्र में, दोनों स्तरों पर प्रतिभा को बढ़ावा देने और विरासत को संरक्षित करने के प्रयास किए गए। कुल मिलाकर, यह अवधि भारत और राजस्थान दोनों में प्रगतिशील शासन, सतत विकास और समावेशी विकास की दिशा में एक ठोस प्रयास को दर्शाती है।
II. प्रस्तावना
यह रिपोर्ट जुलाई 2024 से जुलाई 2025 तक की अवधि के लिए राजस्थान और भारत में समसामयिक घटनाओं का विषयवार, व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसका उद्देश्य प्रमुख नीतिगत परिवर्तनों, आर्थिक बदलावों, सामाजिक कार्यक्रमों, पर्यावरणीय पहलों, वैज्ञानिक प्रगति और सांस्कृतिक मुख्य विशेषताओं की गहन जांच प्रदान करना है, जो उनके निहितार्थों और अंतर्संबंधों पर एक विशेषज्ञ-स्तरीय परिप्रेक्ष्य प्रदान करता है।
जुलाई 2024 से जुलाई 2025 तक की अवधि विधायी सुधारों, महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और राष्ट्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर डिजिटल परिवर्तन और समावेशी विकास की दिशा में एक ठोस प्रयास से चिह्नित है। यह रिपोर्ट इस बात की पड़ताल करती है कि ये विविध पहल भारत के सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य को कैसे आकार दे रही हैं, जिसमें राजस्थान पर विशेष ध्यान दिया गया है।
III. राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स: भारत (जुलाई 2024 – जुलाई 2025)
A. राजनीतिक और शासन संबंधी विकास
जुलाई 2024 से जुलाई 2025 की अवधि में भारत में शासन और नीति निर्माण में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखे गए, जो एक आधुनिक, पारदर्शी और कुशल प्रशासनिक ढांचे की दिशा में एक स्पष्ट बदलाव को दर्शाते हैं।
प्रमुख विधायी परिवर्तन और नीतिगत सुधार:
1 जुलाई, 2025 से, भारत में तीन नए आपराधिक कानून लागू होंगे: भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023, और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 । ये कानून 150 साल पुराने दंड-आधारित न्याय प्रणाली को एक अधिक न्याय-उन्मुख ढांचे के साथ बदलने के लिए तैयार हैं, जो कानूनी प्रणाली के आधुनिकीकरण में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है।
वित्तीय नियमों में भी महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं, जो 1 जुलाई, 2025 से लागू होंगे। नए पैन कार्ड प्राप्त करने के लिए अब आधार कार्ड अनिवार्य होगा, यह केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) द्वारा कर प्रणाली को मजबूत करने और पहचान सत्यापन में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक उपाय है । आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि भी 31 जुलाई से बढ़ाकर 15 सितंबर, 2025 कर दी गई है, जिससे करदाताओं को राहत मिली है । इसके अतिरिक्त, मासिक जीएसटी भुगतान फॉर्म GSTR 3B जुलाई 2025 से अपरिवर्तनीय होगा ।
रेल यात्रा में भी बदलाव अपेक्षित हैं, जिसमें 1 जुलाई, 2025 से किराए में वृद्धि होगी। गैर-एसी मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए 1 पैसा प्रति किलोमीटर और एसी क्लास के लिए 2 पैसे प्रति किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी । तत्काल टिकट बुकिंग के लिए आधार-ओटीपी सत्यापन अनिवार्य होगा, और पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए एजेंटों पर शुरुआती बुकिंग पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे ।
अन्य नीतिगत घोषणाओं में, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 30 जून, 2025 को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कृषि वानिकी नियमों में ढील दी । सांख्यिकी दिवस 2025 पर GOI Stats ऐप लॉन्च किया गया , और ESIC ने SPREE को एमनेस्टी स्कीम 2025 के साथ फिर से शुरू किया । G7 देशों ने वैश्विक न्यूनतम कर से अमेरिकी कंपनियों को छूट देने पर भी सहमति व्यक्त की ।
महत्वपूर्ण नियुक्तियाँ और प्रमुख निर्णय:
इस अवधि में कई उच्च-प्रोफ़ाइल नियुक्तियाँ भी देखी गईं। जुलाई 2024 में, गौतम गंभीर को भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम का नया मुख्य कोच नियुक्त किया गया । नवंबर 2024 में, विक्रम मिश्री का विदेश सचिव के रूप में कार्यकाल बढ़ाया गया , और राजेश कुमार सिंह ने नए रक्षा सचिव के रूप में पदभार संभाला । जून 2024 में, भर्तृहरि महताब को 18वीं लोकसभा के प्रोटेम स्पीकर के रूप में नियुक्त किया गया ।
राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में निरंतरता पर जोर देते हुए, अजीत डोभाल को 2024 में तीसरी बार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) के रूप में फिर से नियुक्त किया गया । सैन्य नेतृत्व में भी बदलाव हुए, जिसमें दिनेश कुमार त्रिपाठी को 2024 में नए नौसेना प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया । वित्तीय क्षेत्र में, अविरल जैन को अक्टूबर 2024 में आरबीआई के कार्यकारी निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया । इसके अतिरिक्त, 18 फरवरी, 2025 से ज्ञानेश कुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संभाला , और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 28 जुलाई, 2024 को 9 राज्यों में नए राज्यपाल और पुडुचेरी के लिए एक उपराज्यपाल की नियुक्ति की ।
प्रेक्षण:
नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन, पैन-आधार लिंकेज और आईटीआर समय सीमा जैसे वित्तीय नियमों में बदलाव, और GOI Stats ऐप और तत्काल टिकटों के लिए आधार-ओटीपी जैसे डिजिटल पहलों का एक साथ होना, शासन को आधुनिक बनाने की दिशा में एक मजबूत और जानबूझकर किए गए प्रयास को दर्शाता है। यह एक स्पष्ट प्रवृत्ति है जो डिजिटल एकीकरण और बढ़ी हुई पारदर्शिता के माध्यम से एक अधिक डिजिटल-सक्षम प्रशासनिक ढांचे की ओर इशारा करती है। यह बदलाव दक्षता, पारदर्शिता और बेहतर अनुपालन के लिए एक प्रणालीगत बदलाव का सुझाव देता है।
नए पैन-आधार नियम और आईटीआर दाखिल करने में बदलाव प्रत्यक्ष उपाय हैं जिनका उद्देश्य कर प्रणाली को मजबूत करना और पहचान सत्यापन में सुधार करना है। यह वित्तीय अनियमितताओं को कम करने और वित्तीय प्रणाली की समग्र अखंडता को बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा एक निरंतर, ठोस प्रयास को दर्शाता है। यह दर्शाता है कि डिजिटल एकीकरण का उपयोग वित्तीय अनुशासन को बेहतर बनाने और अनुपालन बढ़ाने के लिए एक प्राथमिक उपकरण के रूप में किया जा रहा है।
अजीत डोभाल को तीसरी बार एनएसए के रूप में फिर से नियुक्त करना और विक्रम मिश्री का विदेश सचिव के रूप में कार्यकाल बढ़ाना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति भूमिकाओं में निरंतरता और अनुभवी नेतृत्व के लिए एक जानबूझकर प्राथमिकता का सुझाव देता है। यह स्थिरता बनाए रखने और मौजूदा विशेषज्ञता का लाभ उठाने के लिए एक रणनीतिक निर्णय को इंगित करता है, खासकर चुनाव के बाद के परिदृश्य में, बजाय नेतृत्व में महत्वपूर्ण बदलावों का विकल्प चुनने के।
B. आर्थिक परिदृश्य और निवेश
जुलाई 2024 से जुलाई 2025 तक की अवधि में भारत ने एक स्थिर आर्थिक प्रक्षेपवक्र का प्रदर्शन किया, जिसमें विकास को बढ़ावा देने और व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए रणनीतिक निवेश और नीतिगत उपायों पर जोर दिया गया।
जीडीपी वृद्धि और आर्थिक दृष्टिकोण:
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए, वित्त वर्ष 2024-25 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 6.4% रहने का अनुमान है । यह आंकड़ा, जबकि मजबूत है, वित्त वर्ष 2023-24 में दर्ज 8.2% की वृद्धि की तुलना में एक मध्यम स्तर को दर्शाता है । भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने विकास अनुमान को 7.2% से घटाकर 6.6% कर दिया है, जो एक सतर्क दृष्टिकोण का संकेत देता है । आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 में वित्त वर्ष 2025 के लिए वास्तविक जीडीपी और सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) की वृद्धि 6.4% अनुमानित है, जो दशक के औसत के अनुरूप है ।
बाहरी क्षेत्र में स्थिरता बनी रही, दिसंबर 2024 के अंत तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $640.3 बिलियन था, जो 10.9 महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है। सितंबर 2024 तक बाहरी ऋण से जीडीपी अनुपात 19.4% पर स्थिर रहा, जो व्यापक आर्थिक स्थिरता को दर्शाता है ।
प्रमुख निवेश परियोजनाएं और बुनियादी ढांचा पहल:
केंद्रीय बजट 2025-24 (संभवतः 2024-25) नागरिकों, विशेष रूप से गरीबों और हाशिए पर रहने वाले लोगों को सशक्त बनाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है, जो 2014 से स्थापित नींव पर आधारित है, और 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण पर केंद्रित है । यह बजट रोजगार सृजन, कौशल विकास पहल को बढ़ाने, एमएसएमई उद्योगों का समर्थन करने और मध्यम वर्ग के विकास के लिए एक मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है । बजट में कृषि उत्पादकता और लचीलेपन को बढ़ाने सहित नौ प्रमुख प्राथमिकताओं की रूपरेखा भी दी गई है ।
पीएम विश्वकर्मा (जुलाई 2024 तक 5,03,161 कारीगर प्रमाणित) , पीएम स्वनिधि (17 जुलाई, 2024 तक 65 लाख स्ट्रीट वेंडरों को 86 लाख से अधिक ऋण, ₹11,680 करोड़ वितरित) , दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) ग्रामीण गरीबी को कम करने के लिए , और स्टैंड अप इंडिया (2025 तक विस्तारित) जैसे कार्यक्रम तेज किए जा रहे हैं ।
पूर्वोदय पहल का उद्देश्य पूर्वी राज्यों (बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश) को औद्योगिक विकास के माध्यम से देश के विकास के इंजन में बदलना है, जिसमें अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे (गया जंक्शन) का विकास शामिल है ।
सड़क संपर्क परियोजनाओं में पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे और बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस-वे जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं । बिजली परियोजनाओं में पीरपैंती में एक नया 2,400 मेगावाट बिजली संयंत्र स्थापित करने में महत्वपूर्ण निवेश किया जाएगा । बिहार में अतिरिक्त बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में एक नया हवाई अड्डा, मेडिकल कॉलेज और खेल सुविधाएं शामिल हैं ।
सरकार आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के तहत की गई प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें विशेष वित्तीय सहायता (₹15,000 करोड़), पोलावरम सिंचाई परियोजना का समय पर पूरा होना, और औद्योगिक गलियारों (विशाखापत्तनम-चेन्नई, हैदराबाद-बेंगलुरु) में बुनियादी ढांचा निवेश शामिल है ।
प्रधानमंत्री आवास योजना का लक्ष्य ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में 3 करोड़ अतिरिक्त घरों का निर्माण करना है । ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचे के लिए ₹2.66 लाख करोड़ का substantial आवंटन किया गया है । प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान आदिवासी समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करेगा, जिसमें 63,000 गांवों को कवर किया जाएगा और 5 करोड़ आदिवासियों को लाभ मिलेगा ।
बजट में एमएसएमई के लिए एक क्रेडिट गारंटी योजना और संकट के दौरान ऋण सहायता के लिए एक व्यवस्था भी शामिल है । ‘तरुण’ श्रेणी के लिए मुद्रा ऋण की सीमा बढ़ाकर ₹20 लाख कर दी गई है ।
राजकोषीय नीतियां और वित्तीय विनियम:
केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जुलाई 2025 तक महंगाई भत्ते (डीए) में 58% की बढ़ोतरी मिलने की उम्मीद है, जो वर्तमान 50% से अधिक है । आईटीआर और पैन परिवर्तनों के अलावा, ऑनलाइन गेमिंग, ₹10,000 से अधिक के डिजिटल वॉलेट लोड और ₹15,000 से अधिक के ईंधन खर्च पर नए शुल्क लागू हो सकते हैं । वित्त वर्ष 2024-25 के लिए बजट अनुमानों में कुल प्राप्तियां (ऋण को छोड़कर) ₹32.07 लाख करोड़ अनुमानित हैं ।
प्रेक्षण:
केंद्रीय बजट 2025-24 (जिसे 2024-25 के रूप में व्याख्या किया गया है) समावेशी विकास पर एक निरंतर और रणनीतिक ध्यान केंद्रित करता है, विशेष रूप से पीएम विश्वकर्मा, पीएम स्वनिधि, डीएवाई-एनआरएलएम और पीएम जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान जैसी योजनाओं के माध्यम से हाशिए पर पड़े वर्गों को लक्षित करता है । साथ ही, औद्योगिक गलियारों, व्यापक सड़क नेटवर्क, नए बिजली संयंत्रों और आवास पहलों (पीएम आवास योजना) में बड़े पैमाने पर निवेश इंगित करता है कि आर्थिक विकास मजबूत बुनियादी ढांचे के निर्माण से काफी हद तक प्रेरित है। यह दोहरा ध्यान समुदायों को ऊपर उठाने के साथ-साथ दीर्घकालिक समृद्धि के लिए मूलभूत आर्थिक क्षमताओं का निर्माण करना चाहता है।
नए पैन कार्ड के लिए आधार को अनिवार्य करना और तत्काल टिकटों के लिए आधार-ओटीपी सीधे सरकार के कर प्रणाली को मजबूत करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लक्ष्य में योगदान देता है । यह एक स्पष्ट कारण संबंध स्थापित करता है जहां डिजिटल एकीकरण को जानबूझकर वित्तीय अनुशासन में सुधार, धोखाधड़ी को कम करने और अर्थव्यवस्था के भीतर समग्र अनुपालन बढ़ाने के लिए एक प्राथमिक उपकरण के रूप में उपयोग किया जाता है।
जबकि भारत की जीडीपी वृद्धि वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 6.4% पर अनुमानित है , आरबीआई द्वारा मामूली कमी और बाहरी ऋण-से-जीडीपी अनुपात में स्थिरता व्यापक आर्थिक प्रबंधन के लिए एक सतर्क और संतुलित दृष्टिकोण का सुझाव देती है। एमएसएमई और ग्रामीण विकास के समर्थन पर जोर आगे व्यापक-आधारित आर्थिक भागीदारी और लचीलापन सुनिश्चित करने के प्रयासों को दर्शाता है, जो संभावित रूप से वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव के खिलाफ बफर के रूप में कार्य करता है और केवल तेजी से विस्तार के बजाय सतत विकास सुनिश्चित करता है।
तालिका: प्रमुख राष्ट्रीय आर्थिक संकेतक (वित्त वर्ष 2024-25)
| संकेतक | मूल्य (वित्त वर्ष 2024-25) | स्रोत |
|—|—|—|
| जीडीपी वृद्धि दर (अनुमानित) | 6.4% | |
| पिछले वर्ष की जीडीपी वृद्धि (वित्त वर्ष 2023-24) | 8.2% | |
| आरबीआई का संशोधित वृद्धि अनुमान (चालू वित्त वर्ष) | 6.6% | |
| विदेशी मुद्रा भंडार (दिसंबर 2024 तक) | $640.3 बिलियन | |
| बाहरी ऋण से जीडीपी अनुपात (सितंबर 2024 तक) | 19.4% | |
| कुल बजट प्राप्तियां (ऋण को छोड़कर) | ₹32.07 लाख करोड़ | |
यह तालिका भारत के व्यापक आर्थिक स्वास्थ्य और राजकोषीय स्थिति का एक संक्षिप्त, त्वरित सारांश प्रदान करती है। नीति शोधकर्ताओं, सरकारी अधिकारियों या छात्रों के लिए, यह महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतकों तक त्वरित पहुंच प्रदान करती है, जिससे उन्हें राष्ट्र के आर्थिक प्रदर्शन, राजकोषीय अनुशासन और समग्र वित्तीय स्थिरता का आकलन करने में मदद मिलती है। यह पिछली अवधियों के साथ आसान तुलना की सुविधा प्रदान करता है और उन आर्थिक संदर्भ की त्वरित समझ की अनुमति देता है जिसमें नीतियां लागू की जा रही हैं।
C. सामाजिक कल्याण और मानव विकास
जुलाई 2024 से जुलाई 2025 की अवधि में भारत में सामाजिक कल्याण और मानव विकास के लिए कई महत्वपूर्ण सरकारी योजनाएं और पहल देखी गईं, जो समावेशी विकास और कमजोर वर्गों के उत्थान पर केंद्रित हैं।
प्रमुख सरकारी योजनाएं और सामाजिक पहल:
केंद्रीय बजट 2025-24 (संभावित रूप से 2024-25) स्पष्ट रूप से “समावेशी मानव संसाधन विकास और सामाजिक न्याय” को प्राथमिकता देता है , जो सामाजिक नीति के लिए मार्ग प्रशस्त करता है। पीएम विश्वकर्मा, पीएम स्वनिधि, दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम), और स्टैंड अप इंडिया जैसी सशक्तिकरण योजनाएं कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), महिला उद्यमियों और स्ट्रीट वेंडरों का समर्थन करने के लिए तेज की जा रही हैं ।
सभी के लिए आवास के लक्ष्य के तहत, प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अतिरिक्त 3 करोड़ घरों का निर्माण करना है । आदिवासी उत्थान के लिए, प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान शुरू किया गया है, जिसका लक्ष्य आदिवासी समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करना है, जिसमें 63,000 गांवों को लक्षित किया गया है और 5 करोड़ आदिवासियों को लाभ होगा । इस पहल में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, वन अधिकार अधिनियम (एफआरए), और वन धन केंद्र जैसे उपाय भी शामिल हैं ।
महिला और बाल विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसमें महिलाओं और लड़कियों को लाभ पहुंचाने वाली योजनाओं के लिए ₹3 लाख करोड़ से अधिक का महत्वपूर्ण आवंटन किया गया है । महिला और बाल विकास मंत्रालय का बजट 2024-25 के लिए 2.5% बढ़कर ₹26,092 करोड़ हो गया है ।
स्वच्छता और स्वास्थ्य के मोर्चे पर, स्वच्छ भारत अभियान – ग्रामीण चरण II (2019-2025) खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) स्थिति को बनाए रखने और ठोस/तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर अपना ध्यान केंद्रित करना जारी रखता है, जिसमें लगभग 1.5 करोड़ शौचालयों का निर्माण किया गया है । इस अभियान को सालाना 60,000-70,000 शिशु जीवन बचाने और 2019 तक डायरिया से होने वाली मौतों को 3 लाख कम करने का श्रेय दिया गया है ।
कृषि सहायता पहलों में 109 नई उच्च उपज वाली फसल किस्मों को जारी करना, 1 करोड़ किसानों के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना, 10,000 जैव-इनपुट केंद्र स्थापित करना और दलहन/तिलहन उत्पादन बढ़ाना शामिल है । कृषि के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) को तीन साल में लागू करने की योजना है ।
रोजगार और कौशल विकास के लिए, बजट प्रावधानों में पांच साल में 20 लाख युवाओं को कुशल बनाने, 1,000 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को अपग्रेड करने, उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने और मॉडल कौशल ऋण योजना को संशोधित करने की योजनाएं शामिल हैं, ताकि सालाना 25,000 छात्रों को ₹7.5 लाख तक के ऋण की पेशकश की जा सके । किसानों की आय का समर्थन करने के लिए, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) एक 100% केंद्र-वित्त पोषित योजना है जो भूमिधारक किसानों को प्रति वर्ष ₹6,000 प्रदान करती है । पीएमएफबीवाई, पीएमकेएसवाई, ई-नाम और कृषि कल्याण अभियान जैसी अन्य कृषि योजनाएं भी जारी हैं ।
स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र के अपडेट:
स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे के संबंध में, आयुष्मान सहकार योजना अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण/नवीनीकरण, चिकित्सा उपकरण खरीदने, कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने और निवारक स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है । असंगठित क्षेत्र के कल्याण के लिए, ई-श्रम पोर्टल असंगठित श्रमिकों के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस के रूप में कार्य करता है, जिसमें 30.68 करोड़ से अधिक पंजीकरण हैं, जिनमें से 53.68% महिलाएं हैं । अटल पेंशन योजना (APY) में 7.25 करोड़ नामांकन हैं, जो अनौपचारिक क्षेत्र के लिए सेवानिवृत्ति सुरक्षा को मजबूत करता है ।
सामाजिक सुरक्षा में चुनौतियां बनी हुई हैं। 2023 की सीएजी रिपोर्ट में निर्माण श्रमिक कल्याण उपकर में ₹70,000 करोड़ से अधिक अप्रयुक्त रहने का उल्लेख किया गया है । इसके अतिरिक्त, भारत का सामाजिक सुरक्षा खर्च (स्वास्थ्य को छोड़कर) जीडीपी का लगभग 5% है, जो वैश्विक औसत (आईएलओ रिपोर्ट 2024-26) के लगभग 13% से काफी कम है । कुछ पोषण कार्यक्रमों में भोजन की निम्न गुणवत्ता के बारे में भी चिंताएं उठाई गई हैं ।
कमजोर वर्गों और सामुदायिक विकास पर ध्यान केंद्रित:
आदिवासी स्वास्थ्य और पर्यावरण पर जोर दिया गया है, जिसमें आदिवासी आहार, मौसमी चक्र और प्राकृतिक उपचार परंपराओं को मुख्यधारा की स्वास्थ्य प्रणालियों में एकीकृत करना शामिल है । आदिवासी समूहों के स्वामित्व वाले विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा मॉडल को बढ़ावा देना और राष्ट्रीय जलवायु अनुकूलन योजनाओं में आदिवासी लोगों को जलवायु संरक्षक के रूप में मान्यता देना भी प्रमुख पहल हैं । सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) का स्थानीयकरण अनुसूचित क्षेत्रों में एकीकृत किया जा रहा है, यह सुनिश्चित करते हुए कि विकास मॉडल सांस्कृतिक समृद्धि और पारिस्थितिक संतुलन को ध्यान में रखें ।
प्रेक्षण:
केंद्र सरकार की सामाजिक कल्याण पहल एक व्यापक और बहुआयामी दृष्टिकोण प्रदर्शित करती है, जो बुनियादी जरूरतों से परे कौशल विकास, वित्तीय समावेशन और आवास (पीएम विश्वकर्मा, पीएम स्वनिधि, पीएम आवास योजना) तक फैली हुई है । महिलाओं और लड़कियों के लिए पर्याप्त आवंटन और आदिवासी समुदायों के लिए समर्पित कार्यक्रम (पीएम जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान, आदिवासी स्वास्थ्य और पर्यावरण प्रथाओं का एकीकरण) ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर पड़े वर्गों को सशक्त बनाने और अधिक न्यायसंगत और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए एक लक्षित रणनीति को उजागर करते हैं।
महत्वाकांक्षी सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के बावजूद, वैश्विक औसत की तुलना में सामाजिक सुरक्षा पर खर्च किए गए जीडीपी का कम प्रतिशत और निर्माण श्रमिक कल्याण उपकर में महत्वपूर्ण अप्रयुक्त धन नीतिगत इरादे और जमीनी स्तर पर प्रभावी प्रभाव के बीच संभावित विसंगतियों को प्रकट करते हैं। यह विरोधाभास धन आवंटन, प्रशासनिक दक्षता और पहुंच में लगातार चुनौतियों का सुझाव देता है, विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के लिए, जो सामाजिक सुरक्षा लक्ष्यों की पूर्ण प्राप्ति में बाधा डालता है।
नई उच्च उपज वाली फसल किस्मों को पेश करने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, जैव-इनपुट केंद्र स्थापित करने , और कृषि के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को लागू करने पर रणनीतिक ध्यान टिकाऊ कृषि और ग्रामीण आजीविका के लिए एक महत्वपूर्ण विषय को दर्शाता है। यह दृष्टिकोण न केवल खाद्य सुरक्षा और कृषि उत्पादकता को बढ़ाने पर केंद्रित है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने और जलवायु लचीलापन को बढ़ावा देने पर भी केंद्रित है, जो दीर्घकालिक ग्रामीण समृद्धि के लिए एक व्यापक रणनीति का निर्माण करता है।
D. पर्यावरण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में प्रगति
जुलाई 2024 से जुलाई 2025 की अवधि में भारत ने पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक नवाचार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत किया, जिसमें सतत विकास और तकनीकी आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया।
पर्यावरण संरक्षण और जलवायु कार्रवाई:
जुलाई 2024 तक, 17 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश को वृक्षारोपण और पारिस्थितिक बहाली के लिए 155,130 हेक्टेयर में ₹909.82 करोड़ आवंटित किए गए हैं । महाराष्ट्र के पालघर जिले में, दहानू डिवीजन में 464.20 हेक्टेयर को जीआईएम के तहत वृक्षारोपण और पारिस्थितिक बहाली के लिए कवर किया गया है ।
भारतीय वन सर्वेक्षण, देहरादून द्वारा प्रबंधित एक वन अग्नि पहचान प्रणाली, रिमोट सेंसिंग तकनीक का उपयोग करके लगभग वास्तविक समय में वन अग्नि का पता लगाती है और जानकारी साझा करती है । पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा वन अग्नि के परिणामस्वरूप उत्पन्न आपदाओं से निपटने के लिए एक आपदा प्रबंधन समूह का भी गठन किया गया है । इस योजना का उद्देश्य वन अग्नि की घटनाओं को कम करना और प्रभावित क्षेत्रों में उत्पादकता को बहाल करना है, जिसमें स्थानीय समुदायों की भागीदारी और आधुनिक तकनीक का उपयोग शामिल है ।
विश्व पर्यावरण दिवस 2025 के अवसर पर, विकास और पर्यावरणीय संतुलन के बीच सामंजस्य स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। मिशन LiFE और ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान को उजागर किया गया,
