राजल बाईसा की चिरजा
तर्ज-जाबा द्यौ सहेल्यो शिव लड़ेला ए
आया म्हे शरण सोरा राखो मां उदाई ए..
राखो मां उदाई सोरा राजल बाई ए
आया म्हे शरण सोरा राखो मां उदाई ए..(स्थाई)
आप पूरोला आशा…
अम्बे म्हारी आ अभिलाषा…
बेग करो घट बासा..रहो मां सहाई ए
आया म्हे शरण सोरा राखो मां उदाई ए..
कहूं मात, किरपा कर दो..
खुशियां सूं, झोली भर दो …
बीस भुजाळी, वर दो…सजो संकळाई ए
आया म्हे शरण सोरा राखो मां उदाई ए..
कोप थे कान्हे पे किन्यो,
छिन में मार…,थे ही भख लिन्यो,
राज पाट रिड़मल ने दिन्यो,
करणी कहाई ए
आया म्हे शरण सोरा राखो मां उदाई ए..
पीथळ टेर पहुंचत पाणी..
आई राजल,पगां ऊभाणी..
नवरोजां री रीत पुराणी..
छिन में छूटाई जी..
आया म्हे शरण सोरा राखो मां उदाई ए..
सुतबारठ,रिछपाल शरणे
बड़े भरोसे..,कीरत बरणे,
ओओ आंगण आंणद भरणे..
रीझ राजलबाई ए
आया म्हे शरण सोरा राखो मां उदाई ए..
राखो मां उदाई सोरा राजल बाई ए..
आया म्हे शरण सोरा राखो मां उदाई ए…
रिछपाल बारहठ रजवाड़ी रचित
चारणवासी चूरू

