KARNI MATA BHAJAN

!!”गीत माँ मेहाई ने अरदास रो”!! *चंडू लालस "भँवर"!!*

!! सोरठो !!

गाफल भूल गयोह,
सुख मांही सरकार नें !
पण हिव दुखः पयोह,
आवो बेगा ईशरी !!

!! “गीत” !!


भीड़ अब पड़ी है आव थूं भग्गती,
पग्गती नही मम अवर पूजा !
स्याय हिव करे नह जगत में शगत्ती,
दगत्ती समय इण मांय दूजा !!1!!

दानवी आज माँ दूख अति देत है,
देत है कष्ट वे आय दामण !
करनला मावड़ी गई थूं केथ है,
जेथ है तेथ सूं आव जामण !!2!!

अम्बिका जदी थूं सिंघ चढ़ आवसी,
जावसी तदी माँ त्रास दधि जाझो !
पात सब आपरा घणो सुख पावसी,
गावसी खुशी रा गीत गाजो !!3!!

थिती में कळू रा देव सब थाकसी,
राखसी मात हिक लाज रैंणो !
तिहारा पूत माँ वाट सै ताक़सी,
साखसी वणी अब राख सैणों !!4!!

दया कर आयने दुष्ट सै दाऴ जे,
धरम थिर राखजे मात धरणी !
‘भँवर’ रा अवग्गुण मती थूं भाऴजे,
काळजै चेप हिय आय करणी !!5!!

दुष्ट मिल जदै दुख पात ने देवसी,
सैवसी केम तद मात शगती !
राखीयों तुझ ही लाज मम रैवसी,
निज्जसी नहीतो जोतआ जगती !!6!!

पूत माँ आपरा तदी दुख पावसी,
जावसी जदी थूं दूर थ्रोगण !
भगवती एम चित थने किम भावसी,
जावसी थाहरी लाज जोगण !!7!!

अब्बखी टेम जे मात नह आवीया,
धावीया नही जे चील बण धोळी !
छोरुओं ऊपरे त्रास अति छाविया,
मावीया घणा दुख वखत मौली !!8!!

पात माँ आपरा कष्ट अती पात है,
जात है वीख में आज जबरी !
मेहजा भूलने गई कित मात है,
गात है पात सब आव गवरी !!9!!

जोग सूं डूबरी आज माँ जात है,
वात है त्रास नह जाय वरणी !
म्हां रे आसरो तुंही हिक मात है,
तात है भ्रात है मात जग तरणी !!10!!

छोरुओं ढाकजे लोवड़ी छिंयांथूं,
सया घण करे माँ मात जग सेवी !
मेहजा ‘भँवर’ रै राखजे मया थूं,
दया हिव दाखजे आय देवी !!11!! *चण्डीदान लाऴस विरचित गीत माँ करणी जी रो !! कविवर ने अपनी काव्य कौशल कला का खुलकर उपयोग किया है, ह्रदय के भाव संमुद्र को मां के चरणो मे अर्पित कर दिया है !!*

राजेन्द्रसिंह कविया संतोषपुरा सीकर !!

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